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07/29/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/29/2026 08:13

PoK चुनाव में 20 मौतों का दावा: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- प्रदर्शनकारी भारत की तरह दुश्मन

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PoK चुनाव में 20 मौतों का दावा: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- प्रदर्शनकारी भारत की तरह दुश्मन

Wed, 29 Jul 2026 06:56 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 29 Jul 2026 06:56 PM IST
सार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव और विवादित सीटों को लेकर जारी आंदोलन के बीच तनाव और बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों के मारे जाने के दावों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने आंदोलनकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए उनसे बातचीत से इनकार किया है, जबकि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन एक-दूसरे के आरोपों को खारिज कर रहे हैं।

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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शन कर रहे लोगों को भारत की तरह "दुश्मन" बताया। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सरकार उनसे कोई बातचीत नहीं करेगी। वहीं, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।
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प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने बुधवार को दावा किया कि सोमवार से अब तक पीओके में कानून-व्यवस्था बलों के साथ हुई झड़पों में उसके कम से कम 20 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, कानून-व्यवस्था एजेंसियों ने इस दावे पर शक जताया है। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पहले सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की।
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ख्वाजा आसिफ ने क्या-क्या कहा?
ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत नहीं होगी। मैं उन्हें भारत की श्रेणी में रखता हूं। मैं उन्हें भारत की तरह ही पाकिस्तान का दुश्मन मानता हूं।" उधर, प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने पत्रकारों से कहा कि जेएएसी के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की और अपनी 38 मांगें रखीं।
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सनाउल्लाह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी बलपूर्वक मुजफ्फराबाद और मीरपुर पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे फिलहाल "भारत जैसे हमले" में लगे हुए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में किसी की मौत नहीं हुई। इस बीच, बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मीरपुर में दुकानें और बाजार बंद रहे।

पीओके में हो रहे तथाकथित चुनाव
सोमवार को पीओके की तथाकथित विधानसभा की 13 सीटों पर पहले चरण का मतदान हुआ था। इसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की। शेष 32 सीटों के लिए दूसरे और तीसरे चरण का मतदान क्रमशः 2 और 10 अगस्त को होगा। पीओके में मुख्य मुकाबला पीएमएल-एन और अन्य दलों के बीच माना जा रहा है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने चुनाव का बहिष्कार किया है।

पहले चरण का चुनाव हिंसा और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों के बीच हुआ। केंद्र में पीएमएल-एन के साथ गठबंधन में शामिल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने आरोप लगाया कि व्यापक धांधली के जरिए पीएमएल-एन को अधिकांश सीटों पर जीत दिलाई गई। जेएएसी पिछले महीने से पीओके की तथाकथित क्षेत्रीय विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। संगठन का आरोप है कि सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद का प्रधानमंत्री बनाने के लिए करता है।

पीओके में चुनावों पर भारत ने दी क्या प्रतिक्रिया?
भारत ने मंगलवार को इन चुनावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को छिपाने और क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने की कोशिश बताया था। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट, लगातार एक जैसा और सर्वविदित है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।"

उन्होंने कहा, "जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी व्यापक प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण, लोगों के मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।"

पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में कई लोगों के मारे जाने का दावा
जेएएसी ने सोमवार को रावलाकोट से क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाला था। संगठन का दावा है कि मार्च में शामिल लोगों पर कानून-व्यवस्था बलों ने गोलीबारी की, जिसमें उसके कई कार्यकर्ताओं की मौत हुई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। जेएएसी की कोर समिति के सदस्य आबिद शाहीन ने बीबीसी से कहा कि सोमवार की झड़पों में लगभग एक दर्जन कार्यकर्ताओं की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हुए।

समिति के एक अन्य सदस्य इम्तियाज असलम ने कहा कि मारे गए लोगों में जेएएसी के संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं। जेएएसी ने यह भी कहा कि उसके मार्च में शामिल लोग हथियारबंद नहीं थे और उनके पास केवल लाठियां थीं। हालांकि, पीओके पुलिस प्रमुख कैप्टन (सेवानिवृत्त) लियाकत अली मलिक ने इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और वे सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे थे।

जून से शुरू हुए पूरे पीओके में प्रदर्शन
जेएएसी ने 9 जून से पूरे पीओके में प्रदर्शन और लंबे मार्च की शुरुआत की थी। सोमवार की हिंसा से पहले तक अशांति में 40 लोगों की मौत होने की खबर थी, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के जवान शामिल थे।

विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए जेएएसी से बातचीत शुरू की थी, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान में जेएएसी के प्रदर्शन के कवरेज पर पूर्ण मीडिया प्रतिबंध लगाए जाने की भी खबर है।

पीओके की तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on July 29, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 29, 2026 at 14:13 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]