09/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/24/2026 07:28
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भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नकली पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने एनालॉग पनीर के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाना और उन्हें असली उत्पाद उपलब्ध कराना है।
इस संशोधन के तहत, 'डेयरी संदर्भ में एनालॉग' श्रेणी में पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत उत्पादों को अब पनीर शब्द का उपयोग बंद करना होगा। यह प्रतिबंध उनके नामकरण, लेबलिंग या विपणन में सख्ती से लागू होगा।
एनालॉग पनीर ऐसे उत्पाद होते हैं जो देखने में पनीर जैसे लगते हैं। हालांकि, उनमें दूध के ठोस पदार्थ कम होते हैं या उन्हें वनस्पति तेलों जैसे अन्य अवयवों से बनाया जाता है। ये उत्पाद अक्सर कम लागत पर तैयार किए जाते हैं। इनकी संरचना और पोषण मूल्य असली पनीर से काफी अलग होते हैं। उपभोक्ताओं को अक्सर यह पता नहीं होता कि वे असली पनीर नहीं खरीद रहे हैं। इससे उनके स्वास्थ्य और वित्तीय हितों को नुकसान पहुंच सकता है। एफएसएसएआई का यह कदम इसी धोखे को रोकने के लिए है।
इस अधिसूचना से एनालॉग पनीर बनाने वाले उत्पादकों को अपने उत्पादों का नाम और विपणन रणनीति बदलनी होगी। उन्हें "पनीर" शब्द का उपयोग पूरी तरह से बंद करना होगा। इससे उन्हें अपने उत्पादों की नई पहचान बनानी होगी। यह बदलाव उनके लिए एक चुनौती हो सकता है लेकिन यह उपभोक्ताओं के विश्वास को मजबूत करेगा। नए नियमों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।