02/08/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/08/2026 05:09
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज आंध्र प्रदेश के अमरावती में अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि ''यह केवल एक इमारत की आधारशिला नहीं है, बल्कि भारत के क्वांटम भविष्य की आधारशिला है।''
क्वांटम प्रौद्योगिकी को एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक आवश्यकता बताते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि यदि भारत आने वाले दशकों में अपनी संचार प्रणालियों, रक्षा वास्तुकला, स्वास्थ्य सेवा नवाचार और वैश्विक तकनीकी स्थिति को सुरक्षित करना चाहता है तो उसके पास इस क्षेत्र में नेतृत्व करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिक्षा राज्य मंत्री श्री नारा लोकेश, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी, डॉ. अमित सिंघी (आईबीएम रिसर्च इंडिया), डॉ. हैरिक विन (टीसीएस), श्री एम.वी. सतीश (एल एंड टी) सहित वरिष्ठ उद्योग जगत के नेता, वरिष्ठ राज्य अधिकारी, संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में शिलान्यास पट्टिका का अनावरण, अमरावती क्वांटम वैली लोगो का अनावरण, आईबीएम और टीसीएस क्वांटम क्लाउड सेवाओं का शुभारंभ, आईबीएम-टीसीएस क्वांटम इनोवेशन सेंटर की स्थापना, क्वांटम टैलेंट हब की घोषणा, एसआरएम विश्वविद्यालय द्वारा क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी, क्वांटम-सेफ एप्लीकेशन्स पहल और नौ उद्योग भागीदारों के साथ कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान शामिल था, जो एक समन्वित उद्योग-अकादमिक-सरकारी साझेदारी का प्रतीक है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक ऐसा नेता बताया जो ''भविष्य में विश्वास रखता है और आने वाले कल के सपने देखता है।'' हैदराबाद के हाई-टेक सिटी में अपने पहले कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री के प्रौद्योगिकी-आधारित शासन से परिचित होने के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में आंध्र प्रदेश में हुई तीव्र प्रगति सहकारी संघवाद की सच्ची भावना और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्णित ''डबल इंजन'' दृष्टिकोण - केंद्र और राज्य के बीच समन्वय - को दर्शाती है।
पिछले सप्ताह विशाखापत्तनम की यात्रा का जिक्र करते हुए मंत्री ने राष्ट्रीय महासागर विज्ञान केंद्र परियोजना का उल्लेख किया, जो 2006 में शुरू हुई थी और लगभग दो दशकों तक रुकी रही, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर पूरी हो गई। यह केंद्र भारत के गहन महासागर मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिससे प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से घोषित नीली अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को और मजबूती मिलेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत आज उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास एक समर्पित राष्ट्रीय क्वांटम मिशन है। लगभग 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, यह मिशन 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों तक फैला हुआ है, जिसे क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री और उपकरणों पर केंद्रित चार विषयगत केंद्रों के माध्यम से संगठित किया गया है। राष्ट्रीय उद्देश्यों में आठ वर्षों के भीतर 1,000 भौतिक क्यूबिट तक के क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, सुरक्षित ग्राउंड-टू-ग्राउंड क्वांटम संचार नेटवर्क स्थापित करना, लंबी दूरी के क्वांटम संचार को सक्षम बनाना और 2,000 किलोमीटर तक अंतर-शहर क्वांटम कुंजी वितरण प्राप्त करना शामिल है।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने समझाया कि क्वांटम प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं से लैस शत्रुओं की दुनिया में पारंपरिक कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा प्रणालियां असुरक्षित बनी रहेंगी। उन्होंने बताया कि क्वांटम एन्क्रिप्शन से डेटा को भेदना लगभग असंभव हो जाएगा और इसे डिकोड करने में खगोलीय समय लग सकता है। रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, यह अभूतपूर्व रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करता है।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी अनुप्रयोगों के बारे में भी बात की, जिनमें ट्यूमर को बिना किसी दुष्प्रभाव के लक्षित करने में सक्षम सटीक विकिरण चिकित्सा, अंगों की गति के अनुसार गतिशील रूप से अनुकूलन और रोगी की तेजी से रिकवरी को सक्षम बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी भी इसी तरह उपग्रह संचार, सुरक्षित संचार अवसंरचना और उन्नत संवेदन क्षमताओं को नया रूप देगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने भले ही कुछ देशों की तुलना में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में देर से प्रवेश किया हो, लेकिन उभरती प्रौद्योगिकियों में वह यह देरी नहीं दोहराएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र की खोज जैसे क्षेत्रों में समानांतर अभियानों के साथ, भारत खुद को अगली वैश्विक तकनीकी के समय में सबसे आगे अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने हाल ही में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार जैव प्रौद्योगिकी, पुनर्योजी चक्र, आनुवंशिक विज्ञान, सॉफ्टवेयर-आधारित प्रणालियों और क्वांटम कंप्यूटिंग की ओर अग्रसर हो रही है।
मंत्री जी ने बताया कि भारत में क्वांटम प्रौद्योगिकी में बी.टेक माइनर कोर्स शुरू हो चुके हैं और एम.टेक प्रोग्रामों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आंध्र प्रदेश में प्रशिक्षित शिक्षकों और संस्थागत सहयोग से संरचित क्वांटम अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की संभावना पर चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि उन्नत निर्माण सुविधाएं और केंद्रीय अनुसंधान अवसंरचना स्थापित की जा रही हैं, जो स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुलभ होंगी। उन्होंने आईआईटी मद्रास द्वारा शुरू किए गए अग्रणी अनुसंधान पार्क मॉडल की भी सराहना की, जिसे अब पूरे देश में अपनाया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि अलग-थलग रहकर काम करने का समय समाप्त हो गया है। अमरावती क्वांटम वैली की सफलता सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास में शामिल करने में निहित है। पांच साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी का विस्तार करना सहयोगात्मक विकास में वर्तमान सरकार के विश्वास को दर्शाता है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पहले ही एक छोटे से हिस्से से बढ़कर 8 अरब डॉलर का क्षेत्र बन चुकी है, और इस एकीकृत दृष्टिकोण के कारण आने वाले वर्षों में इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
मंत्री जी ने समापन भाषण में घोषणा की कि भारत की क्वांटम यात्रा पवित्र नगर अमरावती से शुरू होती है और आंध्र प्रदेश विकसित भारत की दिशा में भारत की प्रगति में एक आधारशिला के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप अपने नवाचार इकोसिस्टम को स्थापित करने वाले राज्यों को भारत सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और इस बात की पुष्टि की कि केंद्र और आंध्र प्रदेश के बीच सहयोग भारत को वैश्विक क्वांटम नेता के रूप में उभरने में गति प्रदान करेगा।
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