Amar Ujala Ltd

09/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/17/2026 05:35

'कैश लाओ, फिर सामान ले जाओ': दुकानों से हटने लगे क्यूआर कोड, चाय-फल विक्रेताओं तक ने यूपीआई लेने से किया इनकार

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'कैश लाओ, फिर सामान ले जाओ': दुकानों से हटने लगे क्यूआर कोड, चाय-फल विक्रेताओं तक ने यूपीआई लेने से किया इनकार

Thu, 17 Sep 2026 04:01 PM IST
Sharukh Khan गौरव शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
गौरव शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 17 Sep 2026 04:01 PM IST
सार

अलीगढ़ में यूपीआई भुगतान पर शुल्क की नई व्यवस्था से व्यापारी तनाव में दिखाई दिए। दुकानों से क्यूआर कोड हटने लगे हैं। चाय-फल विक्रेताओं तक ने यूपीआई लेने से इनकार कर दिया है। व्यापारियों ने कहा कि सरकार का यह फैसला ग्राहकों के लिए भागदौड़ और दुकानदारों के लिए झंझट बन गया है।

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aligarh upi charges - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अलीगढ़ में यूपीआई भुगतान पर शुल्क की नई व्यवस्था को लेकर शहर के बाजारों में असर दिखाई देने लगा है। बुधवार को रसलगंज, जयगंज, महावीर गंज, रेलवे रोड, घंटाघर, रामघाट रोड और दुबे का पड़ाव में कई दुकानदार क्यूआर कोड हटाने और नकद भुगतान पर जोर देने की बात कहते मिले। महावीरगंज में एक किराना दुकानदार ने यहां तक कहा दिया कि कैश लाओ, फिर सामान ले जाना। इसी तरह के हालात तालानगरी सेक्टर एक में चाय स्टॉल और दुबे का पड़ाव में फल विक्रेताओं के यहां भी दिखाई दिए जिन्होंने यूपीआई से भुगतान लेने से इन्कार कर दिया।
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दरअसल केंद्र सरकार ने आगामी 15 अक्तूबर से दो हजार रुपये तक के व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले यूपीआई भुगतान को शुल्क मुक्त रखने और इससे अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) की व्यवस्था की घोषणा की है। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
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महीने में एक लाख रुपये से कम यूपीआई भुगतान लेने वाले कारोबारियों को इससे बाहर रखा गया है, लेकिन अलीगढ़ के दुकानदारों ने इस पर नाराजगी जताई है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने आपात बैठक में आंदोलन करने का फैसला तक ले लिया। यह जानकारी कुछ ही देर में शहर के लगभग सभी बाजारों तक पहुंच गई जिसके बाद दुकानों से क्यूआर कोड हटने का सिलसिला शुरू हुआ।
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दुबे का पड़ाव स्थित कपड़ा बाजार में व्यापारी प्रेम अरोरा ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान के कारण पहले ही कारोबार प्रभावित हो रहा है। अगर कोई ग्राहक पांच हजार रुपये की खरीदारी करता है तो उस पर एमडीआर का भार भी व्यापारी पर आएगा।
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इसी तरह महावीरगंज में किराना कारोबारी पवन कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि व्यापारी थोक बाजार से माल खरीदने में भी ऑनलाइन भुगतान करते हैं। त्योहार का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में नई व्यवस्था से परेशानी बढ़ सकती है।

जब रेलवे रोड पहुंचे तो वहां कचौड़ी विक्रेता सुरेश ने यहां तक कहा कि उनके यहां नकद से ज्यादा ऑनलाइन भुगतान आता है। ग्राहक जेब में ज्यादा नकद लेकर बाजार नहीं आते। ऐसे में क्यूआर कोड हटने पर ग्राहक और दुकानदार दोनों के लिए भुगतान का तरीका बदल जाएगा।
मेरी आदत बन गई यूपीआई, अब रखना पड़ेगा पर्स
रसलगंज में एक दुकान से दवाएं खरीद रहे श्याम नगर निवासी राजेंद्र कुमार ने कहा कि यूपीआई पेमेंट उनकी आदत बन गया है। वे घर से बिना पर्स निकलते हैं और उन्हें पर्स चोरी या गिरने का डर नहीं रहता है। दिल्ली में सरकार ने फैसला लिया है और एक ही दिन में अंतर देखिए कि दुकानों से लौटा रहे हैं।
अब मुझे रोजाना घर से निकलते समय पर्स रखने का तनाव रहेगा। इसी तरह मानिक चौक निवासी पंकज ने कहा कि अब जेब में ज्यादा नकद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। छोटी से लेकर बड़ी खरीदारी तक मोबाइल से भुगतान हो जाता है, लेकिन अब उन जैसे सभी ग्राहकों को नकद का इंतजाम भी करना पड़ेगा।
ग्राहकों को एटीएम की ओर लौटना पड़ेगा
व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई से भुगतान ने खरीदारी आसान कर दी है। कई ग्राहक बिना नकद के बाजार पहुंचते हैं और मोबाइल से भुगतान कर देते हैं। यदि दुकानदार क्यूआर कोड हटाते हैं तो ग्राहकों को सामान खरीदने से पहले नकद का इंतजाम करना होगा। ऐसे में एटीएम से रुपये निकालने की जरूरत बढ़ सकती है।
वापस लेना होगा फैसला, नहीं तो आंदोलन करेंगे
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने यूपीआई लेन-देन पर कर लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। संगठन ने इसे डिजिटल इंडिया की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि यह छोटे और मझोले व्यापारियों के साथ अन्याय होगा। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए यूपीआई को अपनाया है।

गली-कूचे के छोटे दुकानदारों ने भी बिना झिझक डिजिटल भुगतान को स्वीकार किया है। ऐसे में यूपीआई पर कर लगाना व्यापारियों के साथ धोखा होगा। प्रदेश संगठन मंत्री हरिकिशन अग्रवाल ने कहा कि कर लगाने से व्यापार प्रभावित होगा और अर्थव्यवस्था में नकद लेन-देन बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। महानगर अध्यक्ष आलोक प्रताप सिंह ने डिजिटल लेन-देन को निशुल्क और सुरक्षित रखने की मांग की।
Amar Ujala Ltd published this content on September 17, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 17, 2026 at 11:35 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]