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09/15/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/15/2026 07:29

एक्सप्लेनर: क्या यूपीआई के जरिए ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर लगेगा शुल्क? जानिए इससे जुड़े 14 सवालों के जवाब

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एक्सप्लेनर: क्या यूपीआई के जरिए ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर लगेगा शुल्क? जानिए इससे जुड़े 14 सवालों के जवाब

Tue, 15 Sep 2026 05:07 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 15 Sep 2026 05:07 PM IST
सार

2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर चार्ज लगने की खबरें सुर्खियों में हैं। जानिए सरकार की ओर से सोमवार को जारी नए गजट नोटिफिकेशन का पूरा सच क्या है? क्या पी2पी पेमेंट मुफ्त रहेंगे? क्या 0.5% चार्ज का दावा सही है? मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) और ग्राहक शुल्क में क्या अंतर है? पढ़िए आम आदमी के 14 बड़े सवालों के जवाब।

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यूपीआई मुफ्त या लगेगा शुल्क - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

मौजूदा दौर में सुबह की चाय से लेकर राशन और ऑनलाइन शॉपिंग तक के लिए लोग यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। पिछले कुछ दिनों से यूपीआई पर सरकार की ओर से चार्ज लगाने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, सरकार ने अब तक यूपीआई भुगतान पर किसी तरह के शुल्क लगाने की बात से इनकार किया है। इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी बाते हुई हैं, जिसके कारण यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने की खबर ने तूल पकड़ी है।

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फिलहाल सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से एक नई गजट अधिसूचना जारी की गई है। इस नोटिफिकेशन के बाद यह चर्चा जोरों पर है कि क्या 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर अब आम आदमी को अतिरिक्त जेब ढीली करनी पड़ेगी?
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यूपीआई पर चार्ज लगेगा या यह मुफ्त बना रहेगा इसे लेकर आम लोग असमंजस में हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर हमलावर होता दिख रहा है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि क्या सरकार सचमुच 2,000 रुपये से ऊपर के हर पेमेंट पर 0.5 प्रतिशत का चार्ज वसूलने की योजना बना रही है या फिर यह महज अफवाह है?
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आम आदमी के मन में उठ रहे 14 सबसे महत्वपूर्ण सवालों और उनके उत्तरों के जरिए इस पूरे मामले की कड़ियों को परत-दर-परत समझते हैं।
यूपीआई पर लगने वाला शुल्क। - फोटो : amarujala.com

1. सरकार ने नए गजट नोटिफिकेशन में क्या कहा है?

केंद्र सरकार की ओर से 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को 2,000 रुपये तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेन-देन पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस सरकारी निर्देश में साफ किया गया है कि 2,000 रुपये तक के भुगतान पर कोई भी बैंक न तो सीधे तौर पर और न ही अप्रत्यक्ष रूप से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज वसूल सकता है। इसके अतिरिक्त, इस नोटिफिकेशन में रूपे डेबिट कार्ड से किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के डिजिटल भुगतान को भी नो-चार्ज श्रेणी में रखा गया है।

2. किस कानून के तहत यह अधिसूचना जारी की गई है?

सरकार ने यह महत्वपूर्ण अधिसूचना पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत जारी की है। इस कानूनी धारा के तहत जारी निर्देशों के मुताबिक, कोई भी बैंक, डिजिटल वॉलेट कंपनी या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर इन अधिसूचित माध्यमों (यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड) से भुगतान करने वाले ग्राहक या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से किसी भी रूप में शुल्क नहीं ले सकता। इसका मुख्य कानूनी उद्देश्य छोटे डिजिटल लेन-देन को पूरी तरह से वित्तीय बोझ से मुक्त रखना और डिजिटल पेमेंट तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


यूपीआई पर सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन।

3. फ्री यूपीआई के लिए अब 2,000 रुपये की सीमा तय करने की जरूरत क्यों पड़ी?

यही वह मुख्य बिंदु है जिसने देश भर के डिजिटल यूजर्स और अर्थशास्त्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल और संशय पैदा किया है। अब तक यूपीआई के जरिए किए जाने वाले किसी भी लेन-देन पर सामान्य यूजर से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाता था। लेकिन नई अधिसूचना में स्पष्ट रूप से केवल 2,000 रुपये तकके भुगतान को नो-चार्ज कैटेगरी में दर्ज किया गया है। नोटिफिकेशन में 2,000 रुपये की ऊपरी सीमा तय होने के कारण लोगों के मन में यह आशंका पैदा हो गई कि क्या सरकार भविष्य में इस तय सीमा से अधिक के भुगतान पर चार्ज लगाने का कानूनी रास्ता तैयार कर रही है।

4. क्या यूपीआई पेमेंट पर अभी से कोई नया चार्ज या फीस लागू हो गई है?

जी नहीं, बिल्कुल नहीं यदि आप आज 2,000 रुपये से अधिक का यूपीआई भुगतान करते हैं, तो आपके खाते से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं कटेगा। सरकार की नई अधिसूचना में 2,000 रुपये तक के लेन-देन को सुरक्षित दायरे में रखा गया है, लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर फिलहाल कोई भी दर, पेनल्टी या यूजर चार्ज लागू नहीं किया गया है। सरकार ने आधिकारिक रूप से अधिक राशि वाले पेमेंट्स पर तुरंत कोई चार्ज लगाने का एलान नहीं किया है, इसलिए अभी भुगतान महंगा होने की खबर पूरी तरह निराधार है।

यूपीआई पर शुल्क या रहेगा मुफ्त - फोटो : amarujala.com

5. 2,000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर 0.5 प्रतिशत कटौती का दावा कितना सही?

0.5 प्रतिशत चार्ज कटने का दावा एक राजनीतिक आरोप है, जिसे विपक्ष द्वारा उठाया गया है। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई पेमेंट पर 0.5 प्रतिशत का अतिरिक्त चार्ज लगाने की योजना बना रही है। इस गणित के हिसाब से दावा किया गया कि 5,000 रुपये के पेमेंट पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के पेमेंट पर 50 रुपये की कटौती होगी। हालांकि, सरकारी अधिसूचना में 0.5 प्रतिशत या किसी अन्य दर का कोई जिक्र नहीं है और न ही ऐसी कोई कटौती लागू की गई है।

6. विपक्ष का इस मुद्दे पर क्या रुख है और सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आम जनता की जेब से यूपीआई के जरिए नई वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि केंद्र सरकार जनता से वसूली का नया प्लान लेकर आई है, जिसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 0.5 फीसदी की दर से शुल्क वसूला जाएगा। कांग्रेस का तर्क है कि 14 सितंबर के नोटिफिकेशन में 2,000 रुपये की सीमा तय करके सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर भविष्य में वित्तीय बोझ डालने की प्रशासनिक पृष्ठभूमि तैयार कर ली है।

दूसरी ओर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर संभावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। मंगलवार को एक्स पर किए एक पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही UPI के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

7. सत्ता पक्ष और और सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या सफाई आई है?

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक करार दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर जनता के बीच फेक न्यूज फैलाकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है। सरकार की तरफ से भी स्पष्ट किया गया है कि अगस्त 2026 में जारी आधिकारिक बयानों में बार-बार सरकार ने कहा है कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई सेवाएं मुफ्त रहेंगी और किसी भी उपभोक्ता से कोई चार्ज नहीं वसूला जाएगा।

8. क्या एक आम आदमी के दूसरे आदमी को पैसे भेजने पर भी कोई असर पड़ेगा?

बिल्कुल नहीं। सरकार ने अगस्त 2026 में ही यह रुख पूरी तरह साफ कर दिया था कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P यानी एक व्यक्ति के बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के खाते में) किया जाने वाला कोई भी लेन-देन हमेशा मुफ्त रहेगा। चाहे आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार या कामगार को 2,000 रुपये से कम भेजें या 2,000 रुपये से अधिक, P2P श्रेणी के अंतर्गत होने वाले किसी भी ट्रांसफर पर कोई यूजर चार्ज या शुल्क नहीं लगेगा।

यूपीआई मुफ्त या लगेगा शुल्क - फोटो : amarujala.com

9. एमडीआर क्या है और यह उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले चार्ज से कैसे अलग?

इस पूरे विवाद को गहराई से समझने के लिए एमडीआर और यूजर चार्ज के बीच का बुनियादी फर्क समझना बेहद जरूरी है:

  • मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR): यह वह सेवा शुल्क होता है जो किसी दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान (मर्चेंट) द्वारा डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक, नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाता है। यह व्यापारी के व्यापारिक खर्च का हिस्सा होता है।
  • यूजर चार्ज: यह वह फीस होती है जो पेमेंट करने वाले आम ग्राहक के बैंक खाते से सीधे काटी जाती है।

सरकार ने साफ किया है कि ग्राहकों पर कोई यूजर चार्ज नहीं लगाया जा रहा है, और यदि भविष्य में कोई व्यवस्था बनती भी है, तो वह मर्चेंट स्तर पर एमडीआर से जुड़ी हो सकती है, न कि आम उपभोक्ता से।

10. क्या भविष्य में बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होने की संभावना है?

सरकार ने अगस्त 2026 में दिए अपने स्पष्टीकरण में यह संकेत दिया था कि यदि भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को दोबारा पेश भी किया जाता है, तो वह केवल सीमित संख्या वाले बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शंस (व्यापारिक भुगतानों) पर ही लागू होगा। हालांकि, 14 सितंबर के गजट नोटिफिकेशन में 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले संभावित एमडीआर की न तो कोई दर तय की गई है और न ही इसे लागू करने की कोई तारीख घोषित की गई है। यह सवाल अभी नीतिगत स्तर पर खुला हुआ है।

यूपीआई मुफ्त या लगेगा शुल्क - फोटो : amarujala.com

11. सरकार इस मसले पर फिलहाल क्या कर रही है?

बैंकों, सेवा प्रदाताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों वाली एक समिति जल्द ही व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्कों पर निर्णय लेगी। यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) सहित 22 सदस्य हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति आत्मनिर्भरता और बाजार विस्तार सहित विभिन्न कारकों के आधार पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर जल्द ही निर्णय लेगी।

बैंकों, सेवा प्रदाताओं और विभिन्न संघों के प्रतिनिधियों को मिलाकर गठित 'यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी' जल्द ही 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट भुगतानों पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर अंतिम निर्णय लेगी। इस 22 सदस्यीय समिति में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) जैसे प्रमुख निकाय शामिल हैं। समिति द्वारा मर्चेंट चार्ज से जुड़ा फैसला प्रणाली की आत्मनिर्भरता और डिजिटल बाजार के विस्तार जैसे कारकों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

संसद में विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया था कि रेहड़ी-पटरी वालों और सड़क किनारे के विक्रेताओं को किए जाने वाले कम मूल्य के साधारण भुगतानों पर कभी कोई चार्ज नहीं लगेगा। भविष्य में यदि कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होता भी है, तो वह केवल निर्धारित सीमा से अधिक वाले सीमित श्रेणी के व्यापारिक लेन-देन पर ही लागू होगा।

यूपीआई नेटवर्क - फोटो : Amar Ujala

12. भारत में यूपीआई का दायरा कितना बढ़ा है?

25 अगस्त 2016 को लॉन्च किए गए यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। वित्त वर्ष 2017 में इसका कुल लेन-देन मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 तक 4,000 गुना से अधिक बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। केवल जुलाई 2026 में ही देश में 29.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के रिकॉर्ड 2,366 करोड़ यूपीआई लेन-देन प्रोसेस किए गए।

यूपीआई का वैश्विक विस्तार तेजी से हो रहा है और अब यह दुनिया के 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है। इसमें उज्बेकिस्तान सबसे नया जुड़ने वाला देश बना है। उज्बेकिस्तान के अलावा सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में भी भारतीय नागरिक यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकते हैं।

13. दुनिया के दूसरे देशों में डिजिटल पेमेंट पर कितना चार्ज?

दुनिया के अन्य प्रमुख डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की तुलना करें तो ब्राजील के 'पीआईएक्स' इकोसिस्टम में मर्चेंट चार्ज लगभग 0.33 प्रतिशत के आसपास है। वहीं, चीन में डिजिटल भुगतानों पर लगने वाला मर्चेंट चार्ज औसतन 0.40 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

14. यूपीआई पर शुल्क से जुड़ी सबसे बड़ी आशंका क्या है?

केंद्र सरकार की ओर से पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A के तहत जारी 14 सितंबर 2026 का गजट नोटिफिकेशन मुख्य रूप से केवल 2,000 रुपये तक के यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेन-देन को कानूनी तौर पर मुफ्त बनाए रखने की गारंटी देता है। नोटिफिकेशन में 2,000 रुपये के कैप का जिक्र भविष्य में बड़े मर्चेंट लेन-देन पर एमडीआर लागू करने की बात को बल देता है। हालांकि एक बात यह भी तय है कि भविष्य में सरकार चाहे यूपीआई के भुगतान पर एमडीआर के रूप में सरकार मर्चेंट से ही शुल्क वसूले पर उसका भार अंतत: उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा, क्योंकि को भी मर्चेंट अपनी जेब से एमडीआर शुल्क का भुगतान सरकार को नहीं करेगा। वह अपनी क्षतिपूर्ति के लिए इसे ग्राहक से भी वसूल करेगा।

Amar Ujala Ltd published this content on September 15, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 15, 2026 at 13:29 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]