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09/20/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/20/2026 06:25

टाटा संस में बढ़ी तकरार: चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर ट्रस्ट्स ने खोला मोर्चा, बोले- नहीं बदल सकते नियम

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टाटा संस में बढ़ी तकरार: चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर ट्रस्ट्स ने खोला मोर्चा, बोले- नहीं बदल सकते नियम

Sun, 20 Sep 2026 05:47 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, जोधपुर
एएनआई, जोधपुर Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 20 Sep 2026 05:47 PM IST
सार

टाटा ट्रस्ट्स ने एन. चंद्रशेखरन को दोबारा टाटा संस का चेयरमैन बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी है। ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक, उसके दोनों नामित निदेशकों का समर्थन जरूरी था, जबकि नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था। ट्रस्ट्स ने चेयरमैन के कास्टिंग वोट की दलील भी खारिज करते हुए 17 सितंबर के प्रस्ताव को कानूनी रूप से अमान्य बताया है।

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एन चंद्रशेखरन - फोटो : ANI
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विस्तार

टाटा समूह में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के 17 सितंबर के उस फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है, जिसमें चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने का फैसला हुआ था। ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक, ट्रस्ट की ओर से नामित निदेशकों की मंजूरी जरूरी थी। ऐसे में चेयरमैन के पास मौजूद कास्टिंग वोट इस शर्त को खत्म नहीं कर सकता।

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ट्रस्ट्स ने फैसले को बताया नियमों के खिलाफ
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर कोई गतिरोध था ही नहीं। टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक हैं। इनमें से रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, जबकि दूसरे ट्रस्ट-नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने प्रस्ताव का समर्थन किया। ट्रस्ट्स का तर्क है कि दो नामित निदेशकों में बहुमत का मतलब दो है, एक नहीं। इसलिए जरूरी समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव वैध रूप से पारित नहीं हो सकता था।
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बोर्ड में 4-1 से पास हुआ था प्रस्ताव
टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने के प्रस्ताव को 4-1 के अंतर से मंजूरी दी थी। नोएल टाटा ने इसका विरोध किया था। खास बात यह है कि चंद्रशेखरन पहले ही कह चुके थे कि वह अगले कार्यकाल के लिए खुद दावेदारी नहीं करेंगे। हालांकि, बोर्ड के अनुरोध के बाद उन्होंने अपना फैसला बदलने पर सहमति जताई। टाटा संस ने इसी आधार पर उनकी दोबारा नियुक्ति को वैध मानते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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ट्रस्ट्स के लिए 4-1 का आंकड़ा मायने नहीं रखता
टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि पूरे बोर्ड में 4-1 से प्रस्ताव पारित होना इस मामले में निर्णायक नहीं है। उसके मुताबिक, AoA में ट्रस्ट-नामित निदेशकों से जुड़ी अलग शर्त है और उसे पूरा करना जरूरी था। ट्रस्ट्स ने कहा कि वोटों का नतीजा 4-1 हो या कोई और, इससे फर्क नहीं पड़ता। किसी शर्त को या तो पूरा किया जाता है या नहीं किया जाता। इस मामले में ट्रस्ट्स की ओर से जरूरी समर्थन नहीं मिला, इसलिए उनके अनुसार प्रस्ताव भी वैध नहीं है।

कास्टिंग वोट पर भी ट्रस्ट्स ने उठाई आपत्ति
ट्रस्ट्स ने उस दलील को भी खारिज कर दिया है कि नोएल टाटा के विरोध के कारण बोर्ड में बराबरी की स्थिति बन गई थी और इसे चेयरमैन के कास्टिंग वोट से सुलझाया जा सकता था। ट्रस्ट्स का कहना है कि चेयरमैन का कास्टिंग वोट तभी इस्तेमाल किया जा सकता है, जब पूरे बोर्ड के स्तर पर वोट बराबर हों। दो ट्रस्ट-नामित निदेशकों के बीच ऐसी स्थिति पैदा होने पर इसे लागू नहीं किया जा सकता। ट्रस्ट्स के मुताबिक, यहां कोई गतिरोध या बोर्ड की कामकाज में रुकावट नहीं थी, बल्कि कंपनी के अपने नियम ही बता रहे थे कि प्रस्ताव को जरूरी समर्थन नहीं मिला।

ट्रस्ट्स ने प्रस्ताव को बताया 'शुरू से ही शून्य'
इसी आधार पर टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर के प्रस्ताव को वैध नहीं माना है। उसका कहना है कि यह प्रस्ताव "शुरू से ही कानूनी रूप से शून्य" है और इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, टाटा संस अब तक इस आधार पर आगे बढ़ रही है कि बोर्ड ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को वैध तरीके से मंजूरी दे दी है। यानी फिलहाल विवाद का सबसे अहम मुद्दा यही है कि कंपनी के AoA में मौजूद विशेष अधिकारों की व्याख्या किस तरह की जाए।

साइरस मिस्त्री मामले का भी दिया हवाला
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री से जुड़े पुराने मामले का भी हवाला दिया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि उस समय टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने खुद AoA के Articles 104B और 121 में ट्रस्ट-नामित निदेशकों को मिले विशेष मतदान अधिकारों का बचाव किया था। ट्रस्ट्स का तर्क है कि जब कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में इन अधिकारों को अपने सबसे बड़े शेयरधारक के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था, तो अब वह इन्हीं अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मिस्त्री मामले में इन विशेष अधिकारों की जांच की थी, जबकि मौजूदा विवाद खास तौर पर 17 सितंबर के चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर इन नियमों के इस्तेमाल को लेकर है।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल से आगे भी है बड़ा विवाद
टाटा समूह में चल रहा यह मतभेद सिर्फ चेयरमैन के कार्यकाल तक सीमित नहीं है। टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर को कंपनी को संभावित रूप से शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में भी कदम उठाने को मंजूरी दी थी। यह फैसला तब आया, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस के कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को मंजूर नहीं किया। टाटा ट्रस्ट्स कंपनी की लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है और उसने दूसरे विकल्प तलाशने की बात कही है। ट्रस्ट्स का कहना है कि लिस्टिंग से कॉरपोरेट गवर्नेंस बेहतर होने की दलील भी सही नहीं है, क्योंकि टाटा संस पहले से ही कई मामलों में सार्वजनिक कंपनियों जैसे गवर्नेंस मानकों का पालन करती है।

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टाटा संस के भविष्य और ट्रस्ट्स की भूमिका पर टिकी नजर
ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस लंबे समय से स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, ऑडिट कमेटी, नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी, संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन, निदेशकों की रोटेशन से सेवानिवृत्ति और इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने जैसे नियमों का पालन करती रही है। इसलिए उसके मुताबिक, गवर्नेंस सुधारने के नाम पर करीब सौ साल पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदलना जरूरी नहीं है। यह विवाद ऐसे समय में और अहम हो गया है, जब टाटा संस की आगामी शेयरधारक बैठक भी होनी है। चंद्रशेखरन का निदेशक बने रहना और चेयरमैन के तौर पर उनका कार्यकाल दो अलग-अलग शेयरधारक और बोर्ड स्तर के मुद्दे हैं। फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि 17 सितंबर का प्रस्ताव ही वैध नहीं था, जबकि टाटा संस चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन मानकर आगे बढ़ रही है। ऐसे में अब इस पूरे मामले में टाटा संस के AoA में दिए गए ट्रस्ट्स के अधिकारों की कानूनी व्याख्या सबसे अहम मुद्दा बन गई है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 20, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 20, 2026 at 12:25 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]