03/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/23/2026 07:57
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा को बताया कि पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन भारत के संविधान के अनुच्छेद 244 और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों द्वारा शासित होता है। पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 5 के अंतर्गत राज्यपाल की शक्तियों का प्रयोग संबंधित राज्यों के राज्यपालों द्वारा किया जाता है। राज्यपालों द्वारा इन शक्तियों के प्रयोग में लिए गए निर्णय संबंधित राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित और संग्रहित किए जाते हैं। पिछले दस वर्षों के दौरान लिए गए ऐसे निर्णयों से संबंधित जानकारी संबंधित राज्य सरकारों द्वारा संग्रहित की जाती है।
पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 5(1) में निहित प्रावधानों के अनुसार, पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले राज्यों के राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों में शांति और सुशासन के लिए, स्थानीय शासन से संबंधित मामलों सहित, नियम बना सकते हैं। इस संबंध में जारी की गई अधिसूचनाएं संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित की जाती हैं और उनके आधिकारिक अभिलेखों में संग्रहित की जाती हैं।
पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों वाले राज्यों में और राष्ट्रपति के निर्देशानुसार, अनुसूचित जनजातियों वाले लेकिन अनुसूचित क्षेत्रों से रहित राज्यों में भी जनजातीय सलाहकार परिषदों (टीएसी) का गठन किया गया है, ताकि अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित मामलों पर परामर्श दिया जा सके। टीएसी की संरचना, प्रक्रिया और कार्य प्रणाली, जिसमें बैठकों की संख्या भी शामिल है, संबंधित राज्य सरकारों द्वारा पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित की जाती है।
भारत सरकार अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करती रही है, जिसमें टीएसी का प्रभावी कामकाज भी शामिल है। टीएसी द्वारा किए गए कार्यों और संबंधित गतिविधियों का विवरण संबंधित राज्य सरकारों द्वारा रखा जाता है।
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पीके/केसी/जेएस