Amar Ujala Ltd

09/06/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/07/2026 07:58

स्लीप एफएम: सोते देखकर एआई बताएगा आपकी उम्र और 130 बीमारियों का संकेत, कैसे काम करेगा स्टैनफोर्ड का यह मॉडल

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नया और एडवांस एआई मॉडल स्लीप एफएम तैयार किया है। यह एआई मॉडल यूजर को सोते हुए देखकर एक ही रात में यह बता सकता है कि उसे भविष्य में कौन-सी बीमारियां हो सकती हैं और उसकी उम्र कितने वर्ष तक रहने की संभावना है। एजेंसी के अनुसार, इस एआई मॉडल के नतीजे काफी हैरान करने वाले हैं और इनकी सटीकता का स्तर 80 से 90 प्रतिशत तक पाया गया है।

कैसे काम करता है स्लीप एफएम मॉडल?

स्लीप एफएम मॉडल नींद के दौरान शरीर में होने वाली गतिविधियों को बारीकी से समझने की कोशिश करता है। यह रातभर मिलने वाले मस्तिष्क, हृदय और सांसों से जुड़े संकेतों का विश्लेषण करता है।

मॉडल सोते समय मस्तिष्क की तरंगों, दिल की धड़कन, सांस लेने के तरीके और आंखों की हलचल जैसे संकेतों का अध्ययन करता है। इन संकेतों में मौजूद पैटर्न को समझकर यह भविष्य में संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का अनुमान लगाता है।

किस तरह की बीमारियों को का लगाएगा अनुमान?

शोध में बताए गए आंकड़ो के अनुसार, स्लीप एफएम मॉडल लक्षण दिखाई देने से पहले ही भविष्य में होने वाली करीब 130 तरह की बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगा सकता है। इसका मकसद किसी बीमारी का तुरंत इलाज करना नहीं, बल्कि संभावित जोखिम को पहले पहचानने में मदद करना है। अगर किसी व्यक्ति में भविष्य में किसी बीमारी का जोखिम पहले पता चलता है, तो समय पर जांच और इलाज की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

कितनी सटीकता से करता है अनुमान?

  • 84 फीसदी सही पाया गया मृत्यु दर के जोखिम का अनुमान।
  • 80-81 फीसदी सटीकता दिल के दौरे और हार्ट फेलियर के अनुमान में रही।
  • 89 फीसदी सटीक रहा पार्किंसंस के अनुमान का परिणाम।
  • 85 फीसदी सही बताया डिमेंशिया के खतरे का अनुमान।
  • इन आंकड़ों के अनुसार, कुछ गंभीर बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगाने में मॉडल ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।

65 हजार लोगों के डेटा से हुई ट्रेनिंग

स्लीप एफएम मॉडल को बड़े स्तर के क्लिनिकल स्लीप डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। दिए गए विवरण के अनुसार, इसकी ट्रेनिंग 65 हजार लोगों के करीब छह लाख घंटे के क्लिनिकल स्लीप डेटा पर की गई। इतने बड़े डेटा सेट की मदद से एआई मॉडल को नींद के दौरान शरीर में दिखाई देने वाले अलग-अलग पैटर्न और भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंध समझने में मदद मिली।

अन्य मॉडल से कितना अलग?

आमतौर पर भविष्य में किसी बीमारी के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए उम्र, लिंग और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) जैसे सामान्य कारकों का इस्तेमाल किया जाता है। दिए गए शोध विवरण के अनुसार, स्लीप एफएम इन जोखिम मॉडल्स की तुलना में भविष्य की बीमारियों का अनुमान लगाने में ज्यादा सटीक साबित हुआ है। इसकी एक और खासियत है कि यह सिर्फ व्यक्ति की सामान्य जानकारी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि नींद के दौरान शरीर से मिलने वाले कई तरह के संकेतों का विश्लेषण करता है।

समय पर इलाज में मिल सकता है फायदा

इस तरह के एआई मॉडल का सबसे बड़ा संभावित फायदा बीमारी के जोखिम को पहले पहचानना हो सकता है। अगर भविष्य में किसी बीमारी का खतरा समय रहते पता चल जाए, तो व्यक्ति और डॉक्टर समय पर जरूरी जांच और उपचार की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इससे बीमारी के गंभीर होने से पहले उस पर ध्यान देने का मौका मिल सकता है। हालांकि, एआई का अनुमान मेडिकल जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

क्या नींद से भविष्य की बीमारी का पता चलेगा?

स्लीप एफएम का मॉडल यह दिखाता है कि नींद के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत छिपे हो सकते हैं। एआई इन्हीं संकेतों में मौजूद पैटर्न को समझकर भविष्य के संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का अनुमान लगाने की कोशिश करता है।

Amar Ujala Ltd published this content on September 06, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 07, 2026 at 13:58 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]